रविवार, 26 अक्टूबर 2008
चिंता मणि का कटोरा
कहा जाता है कि दुनिया कि रंगत ही निराली होती है। जब कोई वास्तविकता मैं इसे जानता है तो उसे मालूम होता है कि यह सच मुच ही बहुत हट कर होती है। ज्यों ज्यों इसकी गहरे मैं जाने का प्रयास किया जाता है तो यह ओउर गहरी होती जाती है। मैं इसकी गह राइ मापने का पर्यास कर रहा हूँ । इससे बड़ी मुरखता तो कोई नही हो सकती लेकिन जन बुझ कर कर रहा होऊं ताकि कुछ हाथ लग सके । जो जो हाथ लगता जय गा सब से साँझा करता रहूँगा ................